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सर्वकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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पृष्ठ 782

१८
सर्व गीतार्थ संग्रह, ईश्वर प्रसाद योग
चित्सूर्यरूपी श्रीगुरु वंदन—
जय जय देव निर्मल । निज-जनाखिल मंगल ।
जन्म-जरा-जलद-जाळ । प्रभंजन ॥ १ ॥
जय जय देव प्रबल । विदलित मंगल कुल ।
निगमागमद्रुम-फल । फलप्रद ॥ २ ॥
जय जय देव सकल । विगत विषयवत्सल ।
कलितकालकौतूहल । कालातीत ॥ ३ ॥
जय जय दैव निष्कल । स्फुरदमंदानंद बहुल ।
नित्य निरस्ताखिलमल । मूलभूत ॥ ४ ॥
जय जय देव स्वप्रभ । जगदंबुगव्हर्गर्भ नभ ।
भुवनोद्भावारंभ-स्तंभ । भवध्वंस ॥ ५ ॥
जय जय देव निश्चल । चिलित-चित-पान तुंदिल ।
जगदुन्मीलनाविरल- । केलिप्रिय ॥ ६ ॥
जय जय देव विशुद्ध । विदुदयोद्यान-द्विरद ।
शम-दम-मदन-मद-भेद । दयार्णव ॥ ७ ॥
जय जय देवैकरूप । अतिकृत-कंदर्प-सर्प-दर्प ।
भक्त-भाव-भुवन-दीप । तापावह ॥ ८ ॥
जय जय देव अद्वितीय । परिणतोपरमैकप्रिय ।
निज-जन-नित-भजनीय । मायागम्य ॥ ९ ॥