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ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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पृष्ठ 741

सोलहवे अध्यायका ज्ञानेश्वर कृत समालोचन—
ऐसे आसुरी भाव संपूर्ण । तथा उसके सब लक्षण ।
कहे मुक्त होनेके साधन । कृष्णने पार्थसे ॥ ६९ ॥
इस पर वह पुत्र पांडुका । पूछेगा भाव अपने जीवका ।
सुनो वह सब दे चैतन्यका । कान बनाकर ॥ ४७० ॥
व्यास कृपासे संजय सुनाता । तथा इसे कुरु-नृप सुनता ।
श्रीगुरु कृपासे मैं सुनाता । इसको यहां ॥ ७१ ॥
आप संत-जन मेरी ओर । कृपा-वर्षा करें यहां पर ।
मैं आपकी मान्यतानुसार । बनूंगा स्वामी ॥ ७२ ॥
इसीलिये निज अवधान । मुझको देना पसायदान ।
जिससे बनूं सामर्थ्यवान । कहता ज्ञानदेव ॥ ७३ ॥
गीता श्लोक २४
ज्ञानेश्वरी ओवी ४७३
ॐ
६६९ देवासुर-संपद्विभाग-योग