ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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सेवंती जब अरसिक देखते । उसमें विशेष कुछ भी न पाते ।
किंतु सौरभसे सब कुछ खाते । भ्रमर सार ॥ ९५ ॥
ज्ञानेश्वर महाराजका विनय—
वैसे तत्वका करना स्वीकार । खामी देना मुझको लौटाकर ।
कुछ न जानना स्वभाव सार । अबोध शिशुका ॥ ९६ ॥
यद्यपि यह अनजान होता । उसको देख कर माता पिता ।
आनंद विभोर होके सतत । होते हैं प्रसन्न ॥ ९७ ॥
वैसे मेरे सर्वस हैं संत । उनसे करना लाड नित ।
वैसे ही लाड है यह ग्रंथ । मानेंगे आप ॥ ९८ ॥
कव विश्वात्मक यह माझा । स्वामी है निवृत्ति राजा ।
स्वीकार करें यह वाक्पूजा । कहता ज्ञानदेव ॥ ९९ ॥
गीता श्लोक २०
ज्ञानेश्वरी ओवी ५९९.