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सर्वकोश
ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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पृष्ठ 368

१०
विभूति-चिंतनयोग
श्री गुरु निवृत्तिनाथका आध्यात्मिक स्वरूप
विश्वबोधविदग्ध । विद्यारविंद-प्रबोध ।
पराप्रमेय-प्रमद- । विलासिया नमो ॥ १ ॥
संसारतमका तू सूर्य । अप्रतिम परम-वीर्य ।
नमो तरुण-तर-तूर्य । लालनलीला ॥ २ ॥
जगदखिल-पालन । मंगलमणि-निधान ।
स्वजन-वन-चंदन । नमो आराध्यलिंग ॥ ३ ॥
चतुर-चित-चकोरचंद्र । आत्मानुभव-महानरेंद्र ।
श्रुतिगुणगण तू समुद्र । मन्मथ मन्मथ नमो ॥ ४ ॥
सुभाव-भजन-भाजन । तू भवेभ-कुंभ-भंजन ।
विश्व-उद्भवका भवन । नमो श्री गुरुदेव ॥ ५ ॥
श्री गुरुका सामर्थ्य—
तेरा अनुग्रह श्री गणेश । देता है जो अपना स्वरस ।
तब सरस्वतीमें प्रवेश । होता है शिशुका ॥ ६ ॥
आश्वासन उदार देयका । जलाता दीप नव-रसका ।
थाह लगाता तब वाणीका । अनायास ॥ ७ ॥