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ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

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पृष्ठ 367

पड़ेगे अब कृष्णार्जुन वाक्य बीज । सात्विक भाव-युत चित्तमें सहज ।
खिलेगा प्रेम-प्रमेयका बाग आज । श्रोताओंके लिए ॥ ३२ ॥
अजी ! देना अब अवधान । चढना आनंद सिंहासन ।
देवने डाली माला श्रवण- । इंद्रियको आज ॥ ३३ ॥
विभूतियोंका अब महाज्ञान । देगा अर्जुनको सिद्ध श्रीकृष्ण ।
सुनिये ज्ञानदेवका कथन । जो है निवृत्तिका दास ॥ ३४ ॥
गीता श्लोक ३४
ज्ञानेश्वरी ओवी ५३४-
ॐ
(38)