ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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जिससे तेरा अर्जुन । चित्त करे आकलन ।
वैसे करूं निरूपण । विनोदसे ॥ ७६ ॥
नाम अब जिसका योग । उसका क्या है उपयोग ।
तथा अधिकार प्रसंग । कहूँगा तुझे ॥ ७७ ॥
ऐसा जो जो कुछ है । अब तक जो कहा है ।
वह सारा तुझसे है । कहूँगा अभी ॥ ७८ ॥
अब तू चित्त देकर । कथा सुन धनुर्धर ।
ऐसा कहता श्रीधर । अर्जुनसे ॥ ७९ ॥
श्रीकृष्ण अर्जुनके संग । न छोड़के कहेगा योग ।
व्यक्त करूं वह प्रसंग । कहता निवृत्ति दास ॥ १८० ॥
गीता श्लोक २९
ज्ञानेश्वरी ओवी १८०.
ॐ