ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकार्यज्ञान, कर्म विकर्म समासिरूप
आत्मज्ञान, संशय-विच्छेद, ईश्वर
विषयक ज्ञान, समर्पण प्रक्रिया-
जन्य ज्ञान. ईश्वरी भावका ज्ञान,
विभूति ज्ञान, विश्वरूप-बोधज्ञान,
फल त्यागका ज्ञान, वास्तविक-
ज्ञान, दैवी गुणोंका ज्ञान, मनन-
निदिध्यासादिद्वारा शास्त्रीय
ज्ञान, गुण-विस्तार प्रक्रियाजन्य
ज्ञान, बुद्धिका प्रकाश, आकलन
शक्ति, चिंतन शक्ति, ज्ञानत्रिपुटीमें
एक, ज्ञानत्रिपुटीका प्रतीक रूप,
ब्राह्मणोंके कर्तव्यरूप स्वाध्या-
यादिस संपादन करनेवाली संपत्ति,
अध्ययन,
ज्ञानाग्नि- आत्मज्ञानरूपी अग्नि,
ज्ञानोपदेश- आत्मज्ञानका उपदेश.
ज्ञानखड्ग, ज्ञानदीप- ज्ञानरूपी खड्ग
ज्ञानरूपी दीप.
ज्ञानदृष्टि- शास्त्रीय विवेक दृष्टि स्वानुभव
प्रधान विवेकदृष्टि.
ज्ञाननौका- आत्मज्ञानरूपी नौका.
ज्ञानयज्ञ- आत्मज्ञानरूपी यज्ञ, परमेश्वर,
विषयक ज्ञानरूपी यज्ञ, सर्वत्र
ब्रह्मही है उसके बिना अन्य
कुछ भी नहीं ऐसी साम्यदृष्टि जन्य
आचरण, विश्वमें जो कुछ भला
बुरा होता है वह ईश्वरार्पण
होता यह भाव, अविरोधीजीवन
दृष्टि, यह व्यापक ज्ञानयज्ञ है.
अर्थचिंतनयुक्त गीताभ्यास
भी ज्ञानयज्ञ है.
ज्ञानशून्य, ज्ञानहीन- बुद्धिहीन, विवेकहीन.
ज्ञानी- आत्मविषयकज्ञान जिसमें है वह.
ज्ञानीजनवनवसंत- ज्ञानी लोगोंमें आनं-
दका बहार लानेवाला.
ज्ञेय- ज्ञान त्रिपुटीमें एक, नम्रता आदि
ज्ञान लक्षणोंसे जिस वस्तुको
जाना जाता है वह वस्तु; विश्वकी
उत्पत्ति, स्थिति तथा क्षयका मूल
कारण, सबके हृदयमें जो है वह,
ज्ञेय-दर्शन- अपने हृदयस्थको जानना.
ज्ञामोन्मेषवासना- ज्ञानरूपी आनंदकी
वासना करनेवाला.
ज्योतिरिंगण-ज्ञानेश्वरीका मूल मराठी शब्द
जुगनू.
झ
झिल्ली- बहुत पतली खाल. आंख पर
आने वाला जाल.
झुंज- मूलमराठी शब्द लडाई.
झोल- झूठा, मिथ्या, असत्य
मूल मराठी शब्द.
ट-ठ
टेकडी- पहाडी, टीला.
ठाव- स्थान, आसरा.
ठठोली- हंसी मजाक.
ठौर- स्थान.
ड
डबरा- पानीसे भरा हुवा गड्डा. कुंड.
डोंगर- पहाड, टीला.
डोंगी- छोटी नांव.
त
तंतु- सूत, तागा.
तत्- ब्रह्मवाचक शब्द अलिप्त साधना
तथा निष्कामताका प्रतीक
तत्पद- ईश्वरत्व तथा ब्रह्मतत्व. श्रेष्ठ पद.
तत्व- ब्रह्मवस्तु, भाव, सिद्धांत, वस्तुका
यथार्थ रूप, रहस्य, मूलस्थिति,
तत्वज्ञान, विश्वके कारणीभूत मूल
तत्व, जीवनका स्वरूप, पृथक्करण
शास्त्र.
तत्वज्ञ- वस्तुको यथार्थरूप जाननेवाला.
तत्वनिष्ठ- ब्रह्मनिष्ठ.
तप साधना, श्रोत्रादि इंद्रियोंका
संयमाग्निमें हवन, वृत्तिशोषण, वा.
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