ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)
Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary
संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा
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खोल- ज्ञानेश्वरीका मूल मराठी शब्द,
गहरा.
ग
गंगावति- ज्ञानेश्वरीका मूल मराठी शब्द
सामान्य घासपात.
गगन- आकाश.
गंडकी- गंडकी नदी, गंडकीमें मिलनेवाले
शालिग्राम.
गंडस्थल- हाथीके मस्तकका नरम भाग जो
ऊपर उठा हुवा रहता है.
गंधर्व- अदृश्य पुरुष, स्वर्गके गानेवाले
गायक.
गंधर्व नगर- आकाशमें बादलोंद्वारा दीखने
वाला नगरोंका भास.
गंधानिल- सुगंधयुक्त हवा.
गभस्ति- सूर्य.
गरल- विष.
गरिमा- बड़प्पन, गुरुत्व, महिमा, महत्ता.
अष्टसिद्धियोंमें एक.
गर्त- गढ़ा.
गर्दभी- गधी.
गवाक्ष- खिड़की, झरोखा.
गह्वर- गुफा, कंदरा, गुप्तस्थान.
गात्र- शरीर.
गाभा- नया कल्ला, अंकुर, कोपल-मराठी
अर्थमें, अंतरतम भाग, अर्थ
रहस्य.
गायत्री- एक वैदिक छंद. वेदका एक
प्रसिद्ध मंत्र. गायत्री छंदमें तीन
चरण और चौबीस अक्षर होतें हैं।
गिरगिट- बार बार अपना रंग बदलनेवाला
छिपकली जातिका एक प्राणी.
गीतागम- गीतानामका साधनाशास्त्र गीताकी
परंपरा.
गुज-गुज- मूल मराठी शब्द गुह्य, गुप्त.
गुण- मूलतः यह सांख्य शास्त्रका
शब्द, मूलद्रव्य. इसके बाद इसको
एक नैतिक आधार मिला है
गुण लाभदायक, धर्म लक्षण
सूचक, वृत्ति-विशेष.
गुणातीत- गुणोंका अतिक्रमण किया हुवा.
गुणानुसार- गुणके अनुसार.
गुण-कर्म- गुण और कर्म.
गुब्बारा- हवासे आकाशमें उड़नेवाला.
गुरुगम्य- गुरुसे ही समझमें आनेवाला.
गुल्फ- एड़ीके ऊपरकी गांठ.
गुंगची- घुंघची, अंगारवल्ली, गुंजा रती.
गूढ़- गुप्त.
गेह- घर, गृह, मकान.
गोफिया - गोफन.
गोष्ठ- गोष्ठि.
ग्रस्त - पकड़ा हुवा, पीड़ित.
ग्रामसिंह - कुत्ता.
घ.
घट - मिट्टीका घड़ा, मटका.
घंटिका - पैरके घुंगरु कण्ठमणी.
घन - बादल.
घना - गहरे.
घाम - धूप, ताप.
घिघियाना - गिड़गिड़ाना, करुणाजनक
प्रार्थना
घिनाना - घृणा करना.
घिनौना - घृणाजनक, घृणित.
घोर - ज्ञानेश्वरीका मूल शब्द - खुरटिमरना
घ्राण - नाक.
चकोरशावक- चंद्र किरणोंसे अमृत खाकर
जीनेवाले चकोर पक्षीका पिल्ला.
चक्रवाक- जिसका अपनी मादीसे दिनमें
संयोग, रातको वियोग होता है
ऐसा एक पक्षी.
चंगुल- हाथकी अंगुलियोंकी पकड़.
चंडांश- सूर्य.
चतुरचित्तचकोरचंद्र- रसिकोंके चित्तको ही
चकोर मानकर उनको आनंद देने-
वाला चंद्र.
चतुष्पाद- चार पैरवाला जानवर.
२०५ परिशिष्ट ६