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ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

DevanagariMarathipublished1,172 पृष्ठ

पृष्ठ 1150, कुल 1172 में से

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पृष्ठ 1150

कर्म- बिना किये भी जो व्यापार होता
रहता है, चलता रहता है !
कर्मनिष्ठ- कर्ममें श्रद्धा रखनेवाला.
कर्मफल- कर्मके बाह्य फल.
कर्मबंध- कर्मरूपी बंधन.
कर्मबीज- कर्मकी प्रेरणा.
कर्मविरत- कर्मसे विमुख.
कर्मानुगत- कर्मानुसार.
कलंदर- मदारी.
कलितकाल कौतूहल- कालके चमत्कार को जिसने अपने अंकित रखा है ऐसा.
कलुषकरिकेलरी- पापहस्तिरूपी हाथियोंका संहार करनेवाला सिंह.
कल्पना- इंद्रियोंके संमुख अनुपस्थित वस्तुओंके रूप गुणादिको अनुभूत करानेकी अंतःकरणकी शक्ति. मनगढंत बात.
कल्याण- श्रेय, हित, शुभ.
काकीमुद्रा- कौवेकी चोंचसा मुख बनाकर मुखसे अंदर सांस लेनेकी क्रिया इससे साधक निरोगी बनता है.
काम- संगजन्य मूलभूत विकार. विषय सुंदर लगना. विषयोंमें माधुर्यका अनुभव. विषयेच्छा, संतान कामना ऐहिक सुखाशा. भोगाकांक्षा.
कामना- भोगोंकी इच्छा.
काम्यकर्म- फलभोगेच्छासे किये जानेवाले कर्म.
कायी-काई- जल पर अथवा शिलापर आनेवाला घासका जाला.
कारस्थान- षड्यंत्र.
कालकूटकल्लोलतरंग- कालकूट विषके हिलोरोंके तरंग.
कालाग्निरुद्रगूढ- प्रलयकालके भयानक अग्निका सा गूढ.
किरात- प्राचीन कालकी एक वन्य जाति जो क्रूर होती थी

किलनी- पशुओंके देहमें चिपकनेवाला एक कीट. संभवतः वह स्वेदज है.
कुंतलालकमस्तक- जिसके सिरपर घुंगराले बाल हैं.
कुमुदिनी चंद्रविकासी कमल.
कुल्लापडगा- पीकदान, थूकनेका बरतन.
कुश- दर्भ, घास.
कुहर- गुफा.
कुहराम- रोना, पीटना, क्रंदन आर्तक.
कूं़चा- झाडू.-देवघरमें सफ़ाई करनेवाला.
कृतांत- यम, काल, अंत लानेवाला.
कृतार्थ- कृतकृत्य. सफल मनोरथ.
केलिप्रिय- क्रीडाप्रिय.
कैवल्यधाम- मुक्तिमंदिर.
कोंचना- चुभाना, गडाना, गोदना.
कोंदण- जडाव, पच्छी, मूंडा.
कोपल-कोंभ, कोंभ- अंकुर कल्ला.
कोपट- छोटी झोपडी.
कोशकीटक- घर बनाकर अपनेको बाहर जानेका रास्ता न रखनेवाला कीडा जो अपनेलिये घर बनाकर उसी घरमें मरता है !
कोऽहं- मैं कौन हूँ इसकी जिज्ञासा.
कौतुक- आश्चर्य, विनोद, कुतूहल, सराहना.
कौतूहल- कुतूहल.
क्रमयोगी- क्रमानुसार ब्रह्मप्राप्त करनेवाला योगी.
क्रोधावर्त- क्रोधका भंवर.
ख
खत्ती- अनाज सुरक्षित रखनेका स्थान.
खद्योत- जुगनु.
खर- गधा.
खुगीर- नमदा, जीन.
खेचर- आकाशगामी वायु.
खोडरूप- शहतीर, अडगोडा, आधार.

ज्ञानेश्वरी ३०४