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ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

DevanagariMarathipublished1,172 पृष्ठ

पृष्ठ 1146, कुल 1172 में से

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पृष्ठ 1146

यहाँ पृष्ठ का देवनागरी लिप्यंतरण प्रस्तुत है:

[बायाँ स्तम्भ]

अनन्त- देशकालपरिच्छेदशून्य, अपरि-
च्छिन्न, जिसका अंत न हो ऐसा,
अनन्य- एकनिष्ठ, एकरूप, ईश्वरसे भिन्न
अन्य कुछ भी न जाननेवाला,
अनन्यचित्त, अनन्यभक्त
अनन्यभाव आदि ऐसे शब्द
आये हैं.
अनर्गल- व्यर्थ, अंडबंड, लगातार,
अप्रतिहत.
अनवच्छिन्न- अखंड, अविच्छिन्न, अटूट,
अनवरत- अखंड, सतत.
अनवसर- कुसमय, अकाल, जब न होना
चाहिए तब.
अनाक्रोश- आक्रोशरहित, बिना कटूक्तिके,
सहज.
अनात्म- अचैतन्य, जड, असत् पदार्थ.
अनाम- जिसका कोई नाम न हो,
अनावरण- जिसपर कोई आवरण न हो,
खुला.
अनावृत्त- प्रकट, निरावृत्त, खुला.
अनासक्त- असंग, कहीं न उलझाहुवा
निर्लिप्त, न चिपका हुवा.
अनिल- वायु.
अनिष्ट- अमंगल, अकल्याणकारक, अशुभ.
अनुकार- प्रतिबिंब, अनुकरण.
अनुपम- उपमारहित, सर्वश्रेष्ठ, अत्युत्तम.
अनुभव, अनुभूति- प्रत्यक्षदर्शन.
अनुभवी, अनुभावी- प्रत्यक्ष दर्शन किया
हुवा, साक्षात्कारी, मंझाहुवा,
अभ्यस्त.
अनुमान- कयास बांधना, अटकल लगाना,
समझना.
अनुरक्ति- प्रीति, प्रेम.
अनुष्ठान- कार्यारंभ, विधिवत् आचरण,
शास्त्र-विहित कार्य, आराधना.
अनुसंधान- योग, तादात्म्य, तन्मयताके
साथ किसीके पीछे लगना, खोज.
अनुज्ञाता- अनुमोदनकर्ता, आज्ञा देनेवाला.


[दायाँ स्तम्भ]

अन्यथाज्ञान - विपरीत ज्ञान, उलटा
समझना.
अपरिग्रह- व्यर्थ के अथवा अनावश्यक
वस्तुओंका संग्रह नहीं करना.
अपेक्षा- आशा, अभिलाषा, चाह, इच्छा.
अप्रमेय- अगम्य, प्रमाणोंसे जिसकी सिद्धि
नहीं होती हो ऐसा.
अंभ- पानी.
अभय- नहीं डरना, निर्भय,
अभिचार- जारण मारण, जादू टोना, टोटका.
अभिलषित- इच्छित, फलाकांक्षी.
अभिभूत- व्याप्त, वशीभूत, पराभूत, विकल.
अभिव्यक्त-- प्रकाश किया हुवा, प्रकट.
अभीष्ट- इच्छित.
अभेदांतःकरण- एकत्वानुभूत अंतःकरण,
समरसांतःकरण, हृदयसे एकत्वा-
नुभव.
अभोक्ता- जो भोग न करता हो.
अभ्यास- मनोनिग्रहपूर्वक सतत अभ्यास,
भली या अच्छी बातोंकी ओर
विचार पूर्वक मनको लगाना, योग
साधन, ईश्वरमें मन बुद्धि भावके
अर्पणका सतत प्रयास, असद्-
वृत्तिका त्याग तथा सद्वृत्तिके
स्वीकारमें विचारपूर्वक तत्परता,
अध्ययन.
अमनस्क- मनरहित, उदासीन, तटस्थभाव
इच्छा रहित.
अमर्ष- क्रोध.
अर्घ्य- ईश्वरको, अथवा पूज्य व्यक्तिको
गंध पुष्पादि डाल कर हाथ पर
दिया जानेवाला पानी.
अर्चन- पूजा, आदर सत्कार.
अर्चिरार्माग- देवयान, प्रकाशमय मार्ग
ज्योतिर्मय मार्ग.
अर्धोन्मीलन- आधी खुली, आधा खुला.
अलकलट- बालोंकी लटें, बालोंका गुच्छ.


[पाद-टिप्पणी / पृष्ठ संख्या]

ज्ञानेश्वरी २००