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ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

ज्ञानेश्वरी (भावार्थ दीपिका - मूल मराठी ओव्या व हिन्दी व्याख्या)

Dnyaneshwari / Bhavarth Deepika with Hindi Commentary

संत ज्ञानेश्वर महाराज द्वारा

DevanagariMarathipublished1,172 पृष्ठ

पृष्ठ 1147, कुल 1172 में से

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पृष्ठ 1147

अलिप्त- किसी प्रकारका लगाव रहित,
न रहनेका सा रहना, न करनेका
सा करना.
अलौकिक- लोकोत्तर, अनोखा, यहां-जगतमें
न मिलनेवाला.
अवधान- मनोयोग, एकाग्र, चित्तैकाग्रता.
अवधारणा- विचारपूर्वक, स्थिरचित्तसे सुनना.
अवज्ञा- अनादर.
अविकार- विकार रहित.
अवहेलना-ध्यान न देना, उपेक्षा करना,
अनादर करना.
अवांतर- इतर, अन्य.
अविकृत- न बदलनेवाला, अपरिवर्तित
सदैव एकसा रहनेवाला.
अव्यक्त- अगोचर, न दीखनेवाला अप्रगट,
न दीखनेवाली अवस्था, बीजभूत
प्रकृति, निराकार ब्रह्म.
अव्यभिचार-अनन्यता, एकनिष्ठा, संपूर्ण
रूपसे अर्पित.
अव्यय- अविनाशी, निर्विकार, नित्य,
आद्यंत रहित.
अव्याहत- अवरोधरहित, निर्विवाद, सतत,
ठीक.
अशुभ- अमंगल, कर्मबंध, अनिष्ट.
अशेष - अशोख- संपूर्ण, निःशेष, शेष न
रहे ऐसा.
अष्टधाप्रकृति- पृथ्वी, आप, तेज, वायु,
आकाश और मन, बुद्धि, अहंकार
असंग- अकेला, एकाकी, अलिप्त, किसीसे
किसी प्रकार न जुडनेवाला, विरक्त.
असंमोह - विवेक, मोह न होना,
मोहरहित.
असलग - सरल, सुगम, आसान.
असिपत्र - तलवारसा पत्ता.
अस्ताचल - पश्चिम ओरका पहाड.
सायंकालमें सूर्य वहां विश्रांति
करता है ऐसी कल्पना है.
अहंकार ऊर्मिया - अहंकारके तरंग.
अहंकृतिभाव - अहंकार, मैंने किया है ऐसा
भाव.

  • आ-
    आकलन - ग्रहण करना, अपने काबूमें करना
    बटोरना, सही ढंगसे समझना.
    व्यापना.
    आंगिक - अंगके अवयव, शरीर विषयक.
    आगम - तंत्रशास्त्र, परंपरासे चलता आया
    हुआ.
    आगमोक्त - शास्त्रोक्त, आगम-साधना,
    शास्त्रमें जैसा कहा है वैसा.
    आड - ओट, परदा
    आड - कुंई, छांटा कुआ - मूलमराठी शब्द,
    प्रासके लिये लिया, और उसी
    अर्थका स्वीकार किया -
    आडंबर - अवडंबर, ऊपरी दिखाव, फल-
    तडक भडक.
    आतप - धूप, उष्णता, गर्मी, उष्णता.
    आत्मजा - पुत्री.
    आत्मविद् - आत्माको जाना हुआ, आत्म-
    विद्या विभूषत, आत्मज्ञानी.
    आत्मविदूविलास - आत्मज्ञानमें विलास
    करनेवाला.
    आत्मानात्मविचार- जड चेतन विचार,
    आत्मअनात्मविचार.
    आद्यंत- आदिसे अंत तक, आदिअंत रहित.
    आधारचक्र आधारशक्ति- मूलाधारचक्र
    आनंदमोद बहुल- आनंदरूपी सुवाससे
    भरा हुआ.
    आनंदैककला- एकत्वके आनंद कला.
    आप- आर्द्रता.
    आपोशन- भोजनपूर्वका आचमन.
    आप्त- अपने, नातेगोतेके लोग, किसी
    विषयको भलीभांति जाननेवाला,
    पूर्ण तत्वज्ञ, संदेहातीत ज्ञानी,
    ऋषि, विश्वसनीय, अनुभवी.
    आमोदोन्माद- आनंदोन्माद, सुगंधसे
    होनेवाला हर्ष.
    २०१
    परिशिष्ट ६