धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)
Dhani Dharamdas Ji Ki Shabdavali: Belvedere Press
सन्त धनी धर्मदास जी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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शब्द पृष्ठ
खेलत रहलों बाबा चौबरिया ... ... ... ... ३४
खोजहु संत सुजान ... ... ... ... ३९
ग
गगन पिय बसी फेरि ... ... ... ... ३२
गाँठ परी पिया बोले न ... ... ... ७५
गुन कर बौरी .. ... ... ... ४७
गुरु पद अहै सबन से भारी .. ... ... ... ३
गुरु पैयाँ लागौँ ... .. ... ... १९
गुरु मिले अगम के बासी ... ... .. ... १
गुरु मोहिँ सजीवन मूर दई ... .. ... ... १५
गुरू बिन कौन हरै ... ... ... ... ६७
गुरू मोहिँ खूब निहाल कियो ... ... .. .. १
घ
घड़ा एक नीर का फूटा ... .. . . ८
च
चढ़ि अमवा की डारि .. ... .. - ४३
चढ़ि नौरँगिया की डारि ... .. ४४
चरन छाँड़ि प्रभु जावैँ कहाँ ... ... ... २३
चलो सखि देखन चलिये ... ... . .. ५१
चलो सोहगम नारि .. ... ... ... ४०
चलो हसा सतलोक ... . . ... ४२
चाकर हैं निज नाम का ... ... ... ६
चेतो हसा चेतो कोई .. ... .. ... ३१
ज
जग ये दोउ खेलत होरी . . ... ६१
जमुनिया की डारि मोरी .. . ... ... २९
जा के दुवरवा जमिरिया ... ... ... ... ६२
जागु घहुरिया .. ... ... ... ७०
जेहि सुमिर मन का भये ... .. ... ... ७१