धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)
Dhani Dharamdas Ji Ki Shabdavali: Belvedere Press
सन्त धनी धर्मदास जी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसूचीपत्र
पृष्ठ
जीवन-चरित्र ... ... ... .... (१-८)
शब्द
अ
अचरज ख्याल हमारे देसवा ... ... ... ... ३५
अचवन कीजे गुरु ... ... ... ... ३०
अब गुरु मिले सनेही ... ... ... ... २
अब मोहिँ दर्सन देहु ... ... ... ... २७
अमरलोक से हम ... ... ... ... ७५
आज आनंद भये मेरे घर ... ... ... ... ५६
आज घड़ी आनन्द की ... ... ... ... २
आज घर आये साहब मोर ... ... ... ... ५६
आज मेरे सतगुरु आये ... ... ... ... १३
आठ चाम कै गुरिया रे ... ... ... ... ३३
आये दीन-दयाल ... ... ... ... ६७
आरत गुरु कबीर की ... ... ... ... १६
आरत बंदीछोर ... ... ... ... १८
आरत मोहिँ तुम्हारी ... ... ... ... १७
ऐ
ऐसी आरत कहो ... ... ... ... १७
ऐसी आरत दियो ... ... ... ... १७
क
कब तुम मिलिहौ ... ... ... ... २२
कहुवाँ से जिव आयल ... ... ... ... ६३
कहो केते दिन जियचौ हो ... ... ... ... ८
कहाँ बुझाय दरद ... ... ... ... १३
का भरमत भटकत फिरो ... ... ... ... १०
केहि विधि प्रीतम पाइये ... ... ... ... ३१
कैसे आरत करौं ... ... ... ... १६
ख
खेलत रहलौँ अँगनवाँ सखी ... ... ... ... ६४