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धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)

धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)

Dhani Dharamdas Ji Ki Shabdavali: Belvedere Press

सन्त धनी धर्मदास जी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished98 पृष्ठ

पृष्ठ 1, कुल 98 में से

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संतबानी

संतबानी पुस्तक-माला के छापने का अभिप्राय जगत्-प्रसिद्ध महात्माओं की
बानी और उपदेश को जिन का लोप होता जाता है बचा लेने का है। जितनी बानियाँ
हमने छापी हैं उनमें से विशेष तो पहिले छपी नही थीं और जो छपी थीं सो
प्राय ऐसे छिन्न भिन्न और बेजोड़ रूप में या क्षेपक और त्रुटि से भरी हुई कि उन
से पूरा लाभ नहीं उठ सकता था।
हमने देश देशान्तर से बड़े परिश्रम और व्यय के साथ हस्तलिखित दुर्लभ
ग्रंथ या फुटकर शब्द जहाँ तक मिल सके असल या नकल कराके मँगवाये।
भरसक तो पूरे ग्रंथ छापे गये हैं, और फुटकर शब्दों की हालत में सर्व-साधारण
के उपकारक पद चुन लिये हैं, प्राय कोई पुस्तक बिना दो लिपियों का मुकाबला
किये और ठीक रीति से शोधे नहीं छापी गई है और कठिन और अनूठे शब्दों के
अर्थ और संकेत फुट-नोट में दे दिये हैं। जिन महात्मा की बानी है उनका
जीवन-चरित्र भी साथ ही छापा गया है और जिन भक्तों और महापुरुषों के नाम
किसी बानी में आये हैं उनके वृत्तांत और कौतुक संक्षेप से फुट-नोट में लिख
दिये गये हैं।
दो अंतिम पुस्तकें इस पुस्तक माला की अर्थात् “संतबानी संग्रह” भाग १
[ साखी ] और भाग २ [ शब्द ] छप चुकीं जिन का नमूना देखकर महामहो-
पाध्याय श्री पंडित सुधाकर द्विवेदी वैकुंठ-बासी ने गद्गद् होकर कहा था—
“न भूतो न भविष्यति”।
एक अनूठी और अद्वितीय पुस्तक महात्माओं और बुद्धिमानों के वचनों की
“लोक परलोक हितकारी” नाम की गद्य में सन् १९१६ में छपी है जिसके विषय
में श्रीमान् महाराज काशी नरेश ने लिखा है—“वह उपकारी शिक्षाओं का अचरजी
संग्रह है जो सोने के तोल सस्ता है”।
पाठक महाशयों की सेवा में प्रार्थना है कि इस पुस्तक-माला के जो दोष उन
की दृष्टि में आवें उन्हें हमको कृपा करके लिख भेजें जिससे वह दूसरे छापे में
दूर कर दिये जावें ।
हिन्दी में और भी अनूठी पुस्तक छपी हैं जिनमें प्रेम कहानियों के द्वारा
शिक्षा बतलाई गई हैं—उनके नाम और दाम इस पुस्तक के अन्त वाले पृष्ठों
में देखिये ।
मैनेजर, वेलवेडियर छापाखाना,
इलाहाबाद ।