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धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)

धनी धर्मदास जी की शब्दावली (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर साहिब के प्रथम पट्टशिष्य)

Dhani Dharamdas Ji Ki Shabdavali: Belvedere Press

सन्त धनी धर्मदास जी (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished98 पृष्ठ

पृष्ठ 14, कुल 98 में से

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पृष्ठ 14

धरमदास जी की शब्दावली ॰
॥ सतगुरु महिमा का अंग ॥
॥ शब्द १ ॥
गुरु मिले अगम के बासी ॥ टेक ॥
उनके चरन कमल चित दीजे, सतगुरु मिले अबिनासी ॥ १
उनकी सीत प्रसादी लीजे, छूटि जाय चौरासी ॥ २
अमृत बुंद झरै घट भीतर, साध संत जन लासी¹ ॥ ३
धरमदास बिनवै कर जोरी, सार शब्द मन बासी² ॥ ४
॥ शब्द २ ॥
गुरु मोहिँ खूब निहाल कियो ॥ टेक ॥
बूड़त जात रहे भवसागर, पकरि के बाँहि लियो ॥ १
चौदह लोक बसैँ जम चौदह, उनहुँ से छोरि लियो ॥ २
तिनुका तोरि दियो परवाना, माथे हाथ दियो ॥ ३
नाम सुना दियो कंठी माला, माथे तिलक दियो ॥ ४
धरमदास बिनवै कर जोरी, पूरा लोक दियो ॥ ५
॥ शब्द ३ ॥
सतगुरु धोबी जो मिलै, दिल दाग छोड़ावै ॥ टेक ॥
ब्रह्म अगिन परगट करै