धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१३८ ] लोकवग्गो [ ७९
अनुवाद—आओ, विचित्र राजपथके समान इस लोकको देखो, जिसमें
मूढ़ आसक्त होते हैं, ज्ञानी जन आसक्त नहीं होते।
जेतवन सम्मुञ्जानि (थेर)
१७२-यो च पुब्बे पमज्जित्वा पच्छा सो नप्पमज्जति ।
सो'मं लोकं पभासेति अब्भा मुत्तो'व चन्दिमा ॥६॥
( यश्च पूर्वं प्रमाद्य पश्चात् स न प्रमाद्यति ।
स इमं लोकं प्रभासयत्येभ्रान्मुक्त इव चन्द्रमा ॥ ६ ॥ )
अनुवाद—जो पहिले भूल कर फिर भूल नहीं करता, वह मेघसे उन्मुक्त
चन्द्रमाकी भाँति इस लोकको प्रकाशित करता है।
जेतवन अङ्गुलिमाल (थेर)
१७३-यस्स पापं कतं कम्मं कुसलेन पिथिय्यति ।
सो'मं लोकं पभासेति अब्भा मुत्तो'व चन्दिमा ॥७॥
( यस्य पापं कृतं कर्म कुशलेन पिधीयते ।
स इमं लोकं प्रभासयत्यभ्रान्मुक्त इव चन्द्रमा ॥ ७ ॥ )
अनुवाद—जो अपने किये पाप कर्मोंको पुण्यसे ढाक देता है, वह
मेघसे उन्मुक्त० ।
आलवी रंगरेजकी कन्या
१७४-अन्धभूतो अयं लोको तनुकेय विपस्सति ।
सकुन्तो जालमुत्तो'व अप्पो सग्गाय गच्छति ॥८॥
(अन्धभूतोऽयं लोकः, तनुकोऽत्र विपश्यति ।
शकुन्तो जालमुक्त इवाल्पः स्वर्गाय गच्छति ॥ ८ ॥ )