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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 55

४४ ] धम्मपद [ ७।६
अनुवाद—जिसके आस्रव (=मल) क्षीण हो गये, जो आहारमें पर-
तंत्र नहीं, जो शून्यता रूप० ।
श्रावस्ती (पूर्वाराम) महाकच्चायन
६४-यस्सिन्द्रियाणि समथं गतानि,
अस्सा यथा सारथिना सुदन्ता ।
पहीनमानस्स अनासवस्स,
देवापि तस्स पिहयन्ति तादिनो ॥५॥
( यस्येन्द्रियाणि शमतां गतानि
अश्वा यथा सारथिना सुदान्ताः ।
प्रहीणमानस्य अनास्रवस्य देवा
अपि तस्य स्पृहयन्ति तादृशः ॥५॥ )
अनुवाद—सारथीद्वारा सुदान्त (=सुशिक्षित ) अश्वोंकी भाँति
जिसकी इन्द्रियाँ शान्त हैं, जिसका अभिमान नष्ट हो गया,
( और ) जो आस्रवरहित है, ऐसे उस ( पुरुष ) की देवता
भी स्पृहा करते हैं ।
जेतवन सारिपुत्त (थेर)
६५-पठवीसमो नो विरुज्झति
इन्दखीलूपमो तादि सुव्वतो ।
रहदो 'व अपेतकद्दमो
संसारा न भवन्ति तादिनो ॥६॥