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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

पृष्ठ 54, कुल 213 में से

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पृष्ठ 54

७४ ] अरहन्तवग्गो [ ४३
अनुवाद—सचेत हो वह उद्योग करते हैं, (गृह-)सुख में रमण
नहीं करते, हंस जैसे क्षुद्र जलाशयको छोड़कर चले जाते
हैं, (वैसे ही यह अर्हद् ) गृहको छोड़ जाते हैं।
जेतवन बेलट्ठि सीस
६२–येसं सन्निचयो नत्थि ये परिञ्ञातभोजना ।
सुञ्ञतो अनिमित्तो च विमोक्खो यस्स गोचरो ।
आकासे 'व सकुन्तानं गति तेसं दुरन्नया ॥३॥
( येषां सञ्चियो नास्ति ये परिज्ञातभोजनाः ।
शून्यताऽनिमित्तश्च विमोक्षो यस्य गोचरः ।
आकाश इव शकुन्तानां गतिः तेषां दुरन्वया ॥३॥)
अनुवाद—जो (वस्तुओका) सचय नहीं करते, जिनका भोजन
नियत है, शून्यता-स्वरूप तथा कारण-रहित मोक्ष (=निर्वाण)
जिनको दिखाई पडता है; उनकी गति (=गन्तव्य स्थान)
आकाशमें पक्षियोकी (गतिकी) भांति अज्ञेय है ।
राजगृह (वेणुवन) अनुरुद्ध (थेर)
६३-यस्सा'सवा परिक्खीणा आहारे च अनिस्सितो ।
सुञ्ञतो अनिमित्तो च विमोक्खो यस्स गोचरो ।
आकासे 'व सकुन्तानं पदं तस्स दुरन्नयं ॥४॥
( यस्यास्रवाः परिक्षीणा आहारे च अनिःसृतः ।
शून्यताऽनिमित्तश्च विमोक्षो यस्य गोचरः ।
आकाश इव शकुन्तानां पदं तस्य दुरन्वयम् ॥४॥)