धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५।१० ] बालवग्गो [ ३१
अनुवाद—पाप कर्मको—जो कि कटु फल देनेवाला होता है—करते
दुष्ट बुद्धि अज्ञ ( जन ) अपने ही अपने शत्रु बनते हैं।
जेतवन कोई कस्सप
६७-न तं कम्मं कतं साधु यं कत्वा अनुतप्पति ।
यस्स अस्सुमुखो रोदं विपाकं पटिसेवति ॥८॥
( न तत् कर्म कृतं साधु यत् कृत्वाऽनुतप्यते ।
यस्याश्रुमुखो रुदन् विपाकं प्रतिसेवते ॥८॥ )
अनुवाद—उस कामका करना ठीक नहीं, जिसे करके ( पीछे )
अनुताप करना पड़े, और जिसके फलको अश्रुमुख रोते
भोगना पड़े।
( वेणुवन ) सुमन ( माली )
६८-तञ्च कम्मं कतं साधु यं कत्वा नानुतप्पति ।
यस्स प्रतीतो सुमनो विपाकं पटिसेवति ॥६॥
( तच्च कर्म कृतं साधु यत् कृत्वा नानुत्तप्यते ।
यस्य प्रतीतः सुमना विपाकं प्रतिसेवते ॥९॥ )
अनुवाद—उसी कामका करना ठीक है, जिसे करके अनुताप करना
( = पछताना ) न पड़े, और जिसके फलको प्रसन्न मनसे
भोग करे ।
जेतवन उप्पलवण्णा ( थेरी )
६६-मधू'व मञ्ञति बालो याव पापं न पच्चति ।
यदा च पच्चती पापं अथ दुक्खं निगच्छति ॥१०॥