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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 41

३० ] धम्मपदं [ ५।७
श्रावस्ती ( जेतवन ) उदायी ( थेर )
६४-यावजीवम्पि चे बालो पण्डितं पयिरुपासति ।
न सो धम्मं विजानाति दब्बी सूपरसं यथा ॥ ५॥
( यावज्जीवमपि चेद् बालः पंडितं पर्युपास्ते ।
न स धर्मं विजानाति दर्वी सूपरसं यथा ॥५॥ )
अनुवाद—चाहे बाल ( = जड; अज्ञ ) जीवन भर पंडितकी सेवामें
रहे ( तो भी ) वह धर्मको ( वैसे ही ) नहीं जान सकता,
जैसे कि कलछी ( = दब्बी = दयली ) सूप ( = दाल
आदि ) के रसको ।
श्रावस्ती ( जेतवन ) भद्रवर्गीय ( भिक्षुलोग )
६५-मुहुत्तमपि चे विञ्ञू पण्डितं पयिरुपासति ।
खिप्पं धम्मं विजानाति जिह्वा सूपरसं यथा ॥६॥
( मुहूर्त्तमपि चेद् विज्ञः पंडितं पर्युपास्ते ।
क्षिप्रं धर्मं विजानाति जिह्वा सूपरसं यथा ॥६॥ )
अनुवाद—चाहे विज्ञ ( पुरुष ) एक मुहूर्त ही पंडितकी सेवामें
रहे, ( तो भी वह ) शीघ्र ही धर्मको जान सकता है, जैसे
कि जिह्वा सूपके रसको ।
राजगृह ( वेणुवन ) सुप्पबुद्ध ( कोढ़ी )
६६-चरन्ति बाला दुम्मेधा अमित्तेनेव अत्तना ।
करोन्तो पापकं कम्मं यं होति कटुकप्फलं ॥७॥
( चरन्ति बाला दुर्मेधसोऽमित्रेणेवात्मना ।
कुर्वन्तः पापकं कर्म यद् भवति कटुकफलम् ॥७॥ )