सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

पृष्ठ 40, कुल 213 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 40

५।२ ] बालवग्गो [ २९
अनुवाद—यदि विचरण करते अपने अनुरूप भलेमानुषको न पाये,
तो दृढ़ताके साथ अकेला ही विचरे, मूर्खसे मित्रता
नहीं निभ सकती ।
श्रावस्ती आनन्द ( सेठ )
६२—पुत्ता म'त्थि धनम्म'त्थि इति बालो विहञ्ञति ।
अत्ता हि अत्तनो नत्थि कुतो पुत्तो कुतो धनं ॥३॥
( पुत्रा मे सन्ति धनं मे ऽस्ति इति बालो विहन्यते ।
आत्मा हि आत्मनो नास्ति कुतः पुत्रः कुतो धनम् ॥३॥ )
अनुवाद—"पुत्र मेरा है", "धन मेरा है" ऐसा ( करके ) अज्ञ
( नर ) उत्पीड़ित होता है, जब आत्मा ( = शरीर ) ही
अपना नहीं, तो कहाँसे पुत्र और धन ( अपना होगा ) ।
जेतवन गिरहकट चोर
६३—यो बालो मञ्ञती बाल्यं पण्डितो चापि तेन सो ।
बालो च पण्डितमानी, स वे बालो'ति वुच्चति ॥४॥
( यो बालो मन्यते बाल्यं पण्डितश्चापि तेन स ।
बालश्च पंडितमानी स, वै बाल इत्युच्यते ॥४॥ )
अनुवाद—जो ( कि वह ) अज्ञ होकर ( अपनी ) अज्ञताको जानता
है, इस ( अंश ) से वह पंडित ( = जानकार ) है । वस्तुतः
अज्ञ होकर भी जो पंडित होनेका दम भरता है, वही अज्ञ
( =बाल ) कहा जाता है ।