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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 33

२२ ] धम्मपदं [ ४।४
अनुवाद—शैक्ष¹ देवताओं सहित इस यमलोक और पृथिवीको विजय
करेगा। चतुर शैक्ष सुन्दर प्रकारसे उपदिष्ट धर्मके पदोंको
पुष्पकी भाँति चयन करेगा।
श्रावस्ती मरीचि ( कम्मट्ठानिक थेर )
४६—फेणूपमं कायमिमं विदित्वा
मरीचिधम्मं अभिसम्बुधानो ;
छेत्वान मारस्स पपुप्फकानि
अदस्सनं मच्चुराजस्स गच्छे ॥३॥
(फेनोपमं कायमिमं विदित्वा
मरीचिधर्मं अभिसम्बुधानः ।
छित्त्वा मारस्य प्रपुष्पकाणि
अदर्शनं मृत्युराजस्य गच्छेत् ॥ ३ ॥)
अनुवाद—इस कायाको फेनके समान जान, या ( मरु-) मरीचिका के
समान मान, फन्देको तोडकर, यमराजको फिर न
देखनेवाले बनो।
श्रावस्ती विडूडभ
४७-पुप्फानि हेव पचिनन्तं व्यासत्तमनसं नरम् ।
सुत्तं गामं महोघो'व मच्चू आदाय गच्छति ॥ ४॥
¹ निर्वाणके मार्गपर जो इस प्रकार आरूढ हो गये हैं, कि फिर उनका
उससे पतन नहीं हो सकता, ऐसे पुरुषको शैक्ष कहते हैं। उनके तीन भेद हैं—
स्रोतआपन्न, सकृदागामी, अनागामी ।