धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५ ] चित्तवग्गो [ १७
द्वेष, मोह ) के फन्देसे निकलनेके लिए यह चित्त
( तडफडाता है ) ।
श्रावस्ती कोई
३५-दुन्निग्गहस्स लहुनो यत्थ कामनिपातिनो ।
चित्तस्स दमथो साधु चित्तं दन्तं सुखावहं ॥ ३॥
( दुर्निग्रहस्य लघुनो यत्र-काम-निपातिनः ।
चित्तस्य दमनं साधु, चित्तं दान्तं सुखावहम् ॥ ३ ॥ )
अनुवाद—( जो ) कठिनाईसे निग्रह योग्य, शीघ्रगामी, जहाँ
चाहता है वहाँ चला जानेवाला है; ( ऐसे ) चित्तका दमन
करना उत्तम है; दमन किया गया चित्त सुखप्रद होता है ।
श्रावस्ती कोई उत्कण्ठित भिक्षु
३६-सुदुद्दसं सुनिपुणं यत्थ कामनिपातिनं ।
चित्तं रक्खेय्य मेधावी, चित्तं गुत्तं सुखावहं ॥४॥
( सुदुर्दर्शं सुनिपुणं यत्र-कामनिपाति ।
चित्तं रक्षेत् मेधावी, चित्तं गुप्तं सुखावहम् ॥ ४ ॥ )
अनुवाद—कठिनाईसे जानने योग्य, अत्यन्त चालाक, जहाँ चाहे
वहाँ ले जानेवाले चित्तकी, बुद्धिमान् रक्षा करे; सुर-
क्षित चित्त सुखप्रद होता है ।
श्रावस्ती सङ्घरक्खित ( थेर )
३७-दूरङ्गमं एकचरं असरीरं गुहासयं ।
ये चित्तं सञ्ञमेस्सन्ति मोक्खन्ति मारबन्धना ॥५॥
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