सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

पृष्ठ 197, कुल 213 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 197

१८६ ] धम्मपदं [ २६।४०
( यस्य गतिं न जानन्ति देव-गंधर्व-मानुषाः ।
क्षीणास्रवं अरहन्तं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥३८॥ )
अनुवाद—जिसकी गति(=पहुँच) को देवता, गंधर्व, और मनुष्य
नहीं जानते, जो क्षीणास्रव (=रागादिरहित ) और अर्हत्
है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।
राजगृह ( वेणुवन ) धम्मदिन्ना ( थेरी )
४२१-यस्स पुरे च पच्छा च मज्झे च नत्थि किञ्चनं ।
अकिञ्चनं अनादानं तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं ॥३६॥
( यस्य पुरश्च पश्चाच्च मध्ये च नाऽस्ति किंचन ।
अकिंचनं अनादानं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥३९॥ )
अनुवाद— जिसके पूर्व, और पश्चात् और मध्यमें कुछ नहीं है, जो
परिग्रहरहित=आदानरहित है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।
जेतवन अङ्गुलिमाल ( थेर )
४२२-उसभं पवरं वीरं महेसिं विजिताविनं ।
अनेजं नहातकं बुद्धं तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं ॥४०॥
( ऋषभं प्रवरं वीर महर्षि विजितवन्तम् ।
अनेजं स्नातकं बुद्धं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥४०॥ )
अनुवाद—( जो ) ऋषभ (= श्रेष्ठ ), प्रवर, वीर, महर्षि, विजेता,
अकम्प्य, स्नातक और बुद्ध है, उसे मैं ब्राह्मण कहता हूँ ।