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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 198

२६।४१ ] ब्राह्मणवग्गो [ १८७
जेतवन देवहित ( ब्राह्मण )
४२३—पुब्बेनिवासं यो वेदि सग्गापायञ्च पस्सति ।
अथो जातिक्खयंपत्तो अभिञावोसितो मुनि ।
सब्बवोसितवोसानं तमहं ब्रूमि ब्राह्मणं ॥४१॥
( पूर्वनिवासं यो वेद स्वर्गाऽपायं च पश्यति ।
अथ जातिक्षयंप्राप्तोऽभिज्ञाव्यवसितो मुनिः ।
सर्वव्यवसितव्यवसानं तमहं ब्रवीमि ब्राह्मणम् ॥४१॥ )
अनुवाद—जो पूर्व जन्मको जानता है, स्वर्ग और अगतिको जो
देखता है, और जिसका ( पुनर्-) जन्म क्षीण हो गया, (जो)
अभिज्ञा ( = दिव्यज्ञान ) -परायण है, उसे मैं ब्राह्मण
कहता हू ।
२६-ब्राह्मणवर्ग समाप्त
( इति )

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