धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
पृष्ठ 156, कुल 213 में से
संदर्भ में पढ़ें२३।११ ] नागवग्गो [ १४५
अनुवाद—यदि परिपक्व (– बुद्धि ) बुद्धिमान् साथमें विहरनेवाला
(= शिष्य ) सहचर मित्र मिले, तो सभी परिश्रयों
(= विघ्नों) को हटाकर सचेत प्रसन्नचित्त हो उसके साथ
विहार करे ।
३२९-नो चे लभेथ निपकं सहायं
सद्धिं चरं साधुविहारिधीरं ।
राजा 'व रट्ठं विजितं पहाय
एको चरे मातङ्ग रञ्जेव नागो ॥१०॥
( न चेत् लभेत निपकं सहायं
सार्द्ध चरन्तं साधुविहारिणं धीरम् ।
राजेव राष्ट्रं विजितं प्रहाय,
एकश्चरेत् मातंगोऽरण्य इव नागः ॥१०॥ )
अनुवाद—यदि परिपक्व, बुद्धिमान् साथमें विहरनेवाला सहचर
मित्र न मिले, तो राजाकी भाँति पराजित राष्ट्रको छोड़
गजराज हाथीकी तरह अकेला विचरे ।
३३०-एकस्स चरितं सेय्यो नत्थि बाले सहायता ।
एको चरे न च पापानि कयिरा
अप्पोस्सुको मातङ्ग 'रञ्जे'व नागो ॥११॥
( एकस्य चरितं श्रेयो नाऽस्ति बाले सहायता ।
एकश्चरेत् न च पापानि कुर्याद्
अल्पोत्सुको मातंगोऽरण्य इव नागः ॥११॥ )
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