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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 155

१४४ ] धम्मपदं [ २३।९
अनुवाद—यह (मेरा) चित्त पहिले यथेच्छ=यथाकाम, जैसे सुख
मालूम हुआ वैसे विचरनेवाला था; सो आज महावत जैसे
मत्तवाले हाथीको (पकड़ता है, वैसे) मैं उसे जड़से
पकड़ूँगा।
जेतवन कोसलराजका पावेय्यक नामक हाथी
३२७-अप्पमादरता होथ स-चित्तमनुरक्खथ ।
दुग्गा उद्धरथ'त्तानं पङ्के सत्तो'व कुञ्जरो ॥८॥
(अप्रमादरता भवत स्वचित्तमनुरक्षत ।
दुर्गादुद्धरताऽऽत्मानं पंके सक्त इव कुंजरः ॥८॥)
अनुवाद—अप्रमाद (=सावधानता) में रत होओ, अपने मनकी रक्षा
करो, पंकमें फँसे हाथीकी तरह (राग आदिमें फँसे) अपने
को ऊपर निकालो।
पारिलेय्यक बहुतसे भिक्षु
३२८-सचे लभेथ निपकं सहायं
सद्धिं चरं साधुविहारिधीरं ।
अभिभुय्य सव्वानि परिस्सयानि
चरेय्य तेन'त्तमनो सतीमा ॥६॥
(स चेत् लभेत निपकं सहायं
सार्द्धं चरन्तं साधुविहारिणं धीरम्।
अभिभूय सर्वान् परिश्रयान्
चरेत् तेनाऽऽत्तमनाः स्मृतिमान् ॥९॥)