धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२३।७ ] नागवग्गो [ १४३
( धनपालको नाम कुंजरो कटकप्रभेदनो दुर्निचार्यः ।
बद्धः कवलं न भुंक्ते, स्मरति नागवनं कुंजरः ॥५॥ )
अनुवाद—सेनाको तितर .वितर करने वाला, दुर्धर्ष धनपालक नामक
हाथी, ( आज ) बन्धनमें पड़ जाने पर कवल नहीं खाता,
और ( अपने ) हाथियोंके जंगलको स्मरण करता है ।
जेतवन पसेनदी ( कोसलराज )
३२५-मिद्धी यदा होति महग्घसो च निद्धायिता सम्परिवत्तसायी ।
महावराहो 'व निवापपुट्ठो पुनप्पुनं गब्भमुपेति मन्दो ॥६॥
(मृद्धो यदा भवति महाघसश्च निद्रायितः सपरिवर्तशायी ।
महावराह इव निवाप-पुष्टः पुनः पुनः गर्भमुपैति मन्दः ॥६॥)
अनुवाद—जो ( पुरुष ) आलसी, बहुत खाने वाला, निद्रालु, करवट
बदल बदल सोने वाला, तथा दाना देकर पले मोटे सूअर
की भाँति, होता है; वह मन्द बार बार गर्भमें पड़ता है ।
जेतवन ( सामणेर )
३२६-इदं पुरे चित्तमचारि चारिकं
येनिच्छकं यत्थ कामं यथासुखं ।
तदज्ज 'हं निग्गहेस्सामि योनिसो
हत्थिप्पभिन्नं विय अङ्कुसग्गहो ॥७॥
( इदं पुरा चित्तमचरत् चारिकां
यथेच्छं यथाकामं यथासुखम् ।
तदद्याऽहं निग्रहीष्यामि योनिशो
हस्तिनं प्रभिन्नमिवांकुशग्राहः ॥७॥ )