धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४२ ] धम्मपद [ २३।५
दान्तपर राजा चढ़ता है, मनुष्योंमें भी दान्त (=सहनशील)
श्रेष्ठ है, जो कि कटुवाक्योंको सहन करता है।
३२२-वरं अस्सतरा दन्ता आजानीया च सिन्धवा ।
कुञ्जरा च महानागा अत्तदन्तो ततो वरं ॥३॥
( वरमश्वतरा दान्ता आजानीयाश्च सिंधवः ।
कुंजराश्च महानागा आत्मदान्तस्ततो वरम् ॥३॥ )
अनुवाद—खच्चर, उत्तम खेतके सिन्धी घोड़े, और महानाग हाथी
दान्त (=शिक्षित) होनेपर श्रेष्ठ हैं, और अपने को दमन
किया ( पुरुष ) उनसे भी श्रेष्ठ है ।
जेतवन ( भूतपूर्व महावत भिक्षु )
३२३-नहि एतेहि यानेहि गच्छेय्य अगतं दिसं ।
यथाऽत्तना सुदन्तेन दन्तो दन्तेन गच्छति ॥४॥
( नहि एतैर्य्यानैः गच्छेदगतां दिशम् ।
यथा ऽऽत्मना सुदान्तेन दान्तो दान्तेन गच्छति ॥४॥ )
अनुवाद—इन (हाथी, घोड़े आदि) यानोंसे, बिना गई दिशा
वाले (निर्वाण) की ओर नहीं जाया जा सकता, संयमी पुरुष
अपनेको संयम कर संयत (इन्द्रियो) के साथ (वहाँ)
पहुँच सकता है।
जेतवन ( परिजिण्ण ब्राह्मणपुत्त )
३२४-धनपालको नाम कुञ्जरो कटुकप्पभेदनेो दुन्निवारयो।
बद्धो कवलं न भुञ्जति सुमरति नागवनस्स कुञ्जरो ॥५॥