धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
DevanagariHindipublished213 पृष्ठ
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२३—नागवग्गो
जेतवन आनन्द (थेर)
३२०-अहं नागो'व सङ्गामे चापतो पतितं सरं ।
अतिवाक्यं तितिक्खिस्सं दुस्सीलो हि बहुज्जनो ॥ १ ॥
( अहं नाग इव संग्रामे चापतः पतितं शरम् ।
अतिवाक्यं तितिक्षिप्ये, दुःशीला हि बहुजनाः ॥१॥ )
अनुवाद—जैसे युद्धमें हाथी धनुषसे गिरे शरको (सहन करता है)
वैसेही मैं कटुवाक्योको सहन करूँगा; (संसारमें तो)
दुःशील आदमी ही अधिक हैं।
३२१-दन्तं नयन्ति समितिं दन्तं राजाभिरूहति ।
दन्तो सेट्ठो मनुस्सेसु यो'तिवाक्यं तितिक्खति ॥२॥
( दान्तं नयन्ति समितिं दान्तं राजाऽभिरोहति ।
दान्तः श्रेष्ठो मनुष्येषु योऽतिवाक्यं तितिक्षते ॥२॥ )
अनुवाद—दान्त (=शिक्षित) (हाथी)को युद्धमें ले जाते हैं,
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