धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१२५ ] धम्मपदं [ २०।८
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अनुवाद—सभी संस्कृत (=कृत, निर्मित, बनी) चीज़ें अनित्य
हैं, यह जब प्रज्ञासे देखता है, तब सभी दुःखोंसे निर्वेद
(=विराग) को प्राप्त होता है, यही मार्ग (चित्त-)
शुद्धिका है।
[ दुःख-लक्षणम् ]
२७८—सब्बे सङ्खारा दुक्खा 'ति यदा पञ्ञाय पस्सति ।
अथ निब्बिन्दति दुक्खे, एस मग्गो विसुद्धिया ॥६॥
( सर्वे संस्कारा दुःखा इति यदा प्रज्ञया पश्यति ।
अथ निर्विन्दति दुःखानि, एष मार्गो विशुद्धये ॥ ६ ॥)
अनुवाद—सभी संस्कृत (चीजें) दुःखमय हैं ० ।
[ अनात्म-लक्षणम् ]
२७९—सब्बे धम्मा अनत्ता 'ति यदा पञ्ञाय पस्सति ।
अथ निब्बिन्दति दुक्खे एस मग्गो विसुद्धिया ॥७॥
( सर्वे धर्मा अनात्मान इति यदा प्रज्ञया पश्यति ।
अथ निर्विन्दति दुःखानि एष मार्गो विशुद्धये ॥ ७ ॥)
अनुवाद—सभी धर्म (=पदार्थ) बिना आत्माके हैं, ० ।
जेतवन (योगी) तिस्स (थेर)
२८०—उट्ठानकालम्हि अनुट्ठहानो युवा बली आलसियं उपेतो।
संसन्नसङ्कप्पमनो कुसीतो पञ्ञाय मग्गं अलसो न विन्दति॥८॥