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धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)

Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation

महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा

DevanagariHindipublished213 पृष्ठ

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पृष्ठ 134

२०।५ ] मग्गवग्गो [ १२३
जेतवन पाँच सौ भिक्षु
२७५-एतं हि तुम्हे पटिपन्ना दुक्खस्सन्तं करिस्सथ ।
अक्खातो वे मया मग्गो अञ्ञाय सल्लसन्थनं ॥३॥
( एतं हि यूयं प्रतिपन्ना दुःखस्यान्तं करिष्यथ ।
आख्यातो वै मया मार्ग आज्ञाय शल्य-संस्थानम् ॥३॥ )
२७६-तुम्हेहि किच्चं आतप्पं अक्खातारो तथागता ।
पटिपन्ना पमोक्खन्ति झायिनो मारबन्धना ॥४॥
( युष्माभिः कार्यं आतप्यं आख्यातारस्तथागताः ।
प्रतिपन्नाः प्रमोक्ष्यन्ते ध्यायिनो मारबन्धनात् ॥४॥ )
अनुवाद—इस (मार्ग) पर आरूढ हो तुम दुःखका अन्त कर सकोगे,
(स्वयं) जानकर (राग आदिके विनाशमें) शल्य
समान मार्गको मैंने उपदेश कर दिया । कार्यके लिए तुम्हें
उद्योग करना है, तथागतों (=बुद्धों) का कार्य उपदेश
कर देना है, (तदनुसार मार्गपर) आरूढ हो, ध्यानमें रत
पुरुष) मारके बन्धनसे मुक्त हो जायेंगे ।
जेतवन पाँच सौ भिक्षु
[ अनित्य-लक्षणम् ]
२७७-सब्बे सङ्खारा अनिच्चा 'ति यदा पञ्ञाय पस्सति ।
अथ निब्बिन्दति दुक्खे, एस मग्गो विसुद्धिया ॥५॥
( सर्वे संस्कारा अनित्या इति यदा प्रज्ञया पश्यति ।
अथ निर्बिन्दति दुःखानि, एष मार्गो विशुद्धये ॥ ५॥