धम्मपद (पालि मूल, संस्कृत छाया एवं हिन्दी अनुवाद)
Dhammapada with Pali Original & Hindi Translation
महापण्डित राहुल सांकृत्यायन द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२०१ ] मग्गवग्गो [ १२५
(उत्थानकालेऽनुत्तिष्ठन् युवा बली आलस्यमुपेतः ।
संसन्न-संकल्प-मनाः कुसीदः
प्रज्ञया मार्गं अलसो न विन्दति ॥ ८ ॥ )
अनुवाद—जो उत्थान (=उद्योग) के समय उत्थान न करनेवाला,
युवा और बली होकर (भी) आलस्यसे युक्त होता है,
मनके संकल्पोको जिसने गिरा दिया है, और जो कुसीदी
(=दीर्घसूत्री) है, वह आलसी (पुरुष) प्रज्ञाके मार्गको
नहीं प्राप्त कर सकता।
राजगृह (वेणुवन) (शुकर-प्रेत)
२८१-वाचानुरक्खी मनसा सुसंवुतो
कायेन च अकुसलं न कयिरा।
एते तयो कम्मपथे विसोधये
आराधये मग्गमिसिप्पवेदितं ॥६॥
(वाचाऽनुरक्षी मनसा सुसंवृतः
कायेन चाऽकुशलं न कुर्यात् ।
एतान् त्रीन् कर्मपथान् विशोधयेत्,
आराधयेत् मार्गं ऋषिप्रवेदितम् ॥ ९॥)
अनुवाद—जो वाणीकी रक्षा करनेवाला, मनसे संयमी रहे, तथा
कायासे पाप न करे; इन (मन, वचन, काय) तीनों
कर्मपथोंकी शुद्धि करे, और ऋषि (=बुद्ध)के बतलाये
धर्मका सेवन करे।