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सर्वकोश
दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Dayabhaga of Jimutavahana with Hindi Commentary

जीमूतवाहन (टीकाकार: पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी) द्वारा

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( १५ )
CC-0. Agamnigam Digital Preservation Foundation, Chandigarh
विशेषः—
१—ओरस पुत्र उत्पन्न होने पर सवर्ण अन्य पुत्रों को
चतुर्थांश दिया जाय
२—असवर्णा पुत्रों को वस्त्र तथा भोजनादि मात्र । यह
का त्यायन कामत है ।
३—औरस—क्षेत्रज—दत्त—कृत्रिम—गूढोत्पन्न—अपविद्ध—
ये छः दाया द हैं
४—कानीन—सहोढ—क्रीत—पौन र्भव—स्वयंदत्त शौद्र ६ अदा
याद बन्धु हैं ।
[ मनु ६।१५६।१६० ]
सजातीयेष्वयं प्रोक्तस्तनयेषु मयाविधिः
यह विधि सजातीय तनयों के वारे में कही गई है ।
१—पूर्वा भावे परः—परः यह सजातीय विषयक है ।
२—शूद्रा पुत्र औरस होतो भी अन्याभाव में भी भाग
पाने का अधिकारी नहीं ।
शूद्र धन भाग में विशेष—
जातोऽपिदास्याँ शूद्रेण कामतोंऽशहरोभवेत् ।१६।
मृते पितरि कुर्युस्तं भ्रातर स्त्वर्ध भागिकम्
अभ्रातृ को हरेत्सवं दुहितृणाँ सुताहते ॥२०
अन्वयः—
शूद्रेण दास्यां जातः कामतः अंशहरः भवेत् । शूद्र से दासी
में उत्पन्न पुत्र, कामतः=पिता की इच्छा से—भाग प्राप्त कर सकता
है । मृते पितरि=पिता के मरने पर भाई दासी पुत्र को अर्ध
भागी बनाये :