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सर्वकोश
दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Dayabhaga of Jimutavahana with Hindi Commentary

जीमूतवाहन (टीकाकार: पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished46 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 46 में से

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पृष्ठ 35

( १३ )
CC-0. Agamnigam Digital Preservation Foundation, Chandigarh

विशेष:—
१ पुत्रिका सुत--विवाह के समय वचन पूर्वक दी गई कन्या
कि इसमें उत्पन्न पुत्र मेरा होगा पुत्रिका सुत कहलाता है ।
गूढ़ज--कानीन पुत्रों की परिभाषा—
गृहे प्रच्छन्न उत्पन्नो गूढजस्तु सुतः स्मृतः ।
कानीनः कन्यका जातो मातामह सुतो मतः ॥ १६॥
गूढजस्तु सुतः गृहे प्रच्छन्न उत्पन्नः--गूढज पुत्र वह कहलाता
है जो पति के घर में ही हीनाधिक जाति के पुरुष से उत्पन्न हुआ हो ।
कानीन०--कन्य का में उत्पन्न पुत्र कानीन कहलाता है यह
नाना का पुत्र कहलाता है ।
१-मनु ने भी कहा है—
पितृ वेश्मनि कन्या तु यं पुत्रं जनयेद्रहः
तं कानीनं वदेन्नाम्ना वोढुः कन्य समुद्भवम् ॥
पौन र्भव--दत्तक की परिभाषा—
अक्षतायां क्षतायां वा जातः पौनर्भवः सुतः
दद्यान्माता पिता वा यं स पुत्रो दत्तको भवेत् ॥
अन्वय सरल—
अक्षतायां०--अक्षत या क्षत—पनर्भुस्त्री में सवर्ण से
उत्पन्न पुत्र पौनर्भव कहलाता है । दद्यान्माता पिता वायं—जिसे माता
पति की आज्ञा लेकर पति की मृत्यु के पश्चात् या दोनों जिसे दे दें वह
पुत्र दत्तक कहलाता है ।
विशेष:—
१—आपत्ति में पुत्र दिया जाय यह मनुका मत हैं