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सर्वकोश
दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Dayabhaga of Jimutavahana with Hindi Commentary

जीमूतवाहन (टीकाकार: पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished46 पृष्ठ

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पृष्ठ 32

CC-0. Agamnigam Digital Presevation Foundation, Chandigarh
२—१ ब्राह्मणी पत्नी, १ कन्या १ पुत्र है तो पिता के धन
के १/२ भाग करके १ भाग के १/४ भाग करके चतुर्थांश भाग कन्या को
देकर शेष को पुत्र ले
३—यदि १ पुत्र २ कन्या हैं तो पितृधन को १/३ करके १ भाग
को १/४ भाग करके चतुर्थांश दे ।
४—यदि ब्राह्मणी पुत्र १ क्षत्रिय कन्या १ तब ७ भाग करके
क्षत्रिया पुत्र भाग को ४/३ विभाग करके चतुर्थांश क्षत्रिया को दे शेष को
ब्राह्मणी पुत्र ले ।
५—यदि २ ब्राह्मणी पुत्र—१ क्षत्रिय कन्या तब ११ १ ३
अंशों को क्षत्रिया पुत्र भाग को ४ में बांटे चतुर्थांश क्षत्रिया कन्या के
दे शेष को ब्राह्मणी पुत्र बांट लें ।
६—जीवित पिता कुछ भाग कन्या को दे वही उसका है ।
पूर्व निर्णय समान जातीय भाइयों के सम्बन्ध में है अब
भिन्न जातीय भ्राताओं का विभाग लिखा जाता है—
चतुस्त्रिद्व्येक भागाः स्युर्वर्णशो ब्राह्मणात्मजाः
क्षत्रजास्त्रिद्व्येक भागा विड्जास्तु द्व्येक भागिनः॥१२॥
अन्वयः—
ब्राह्मणात्मजाः वर्णशः चतुः त्रि द्वि एक भागास्युः
क्षत्रजा स्त्रि द्वि एक भागा, विड्जास्तु द्वि एक भागिनः।
ब्राह्मणादि वर्ग की स्त्रियों की सन्तति का विभाजन
ब्राह्मणात्मजाः वर्णशः—वर्ण वर्ण में ब्राह्मण से उत्पन्न यथा क्रम,
४, ३, २, १ भाग प्राप्त करें ।
ब्राह्मण द्वारा ब्राह्मणी में उत्पन्न एक-एक—४-४ भाग ले
ब्राह्मण द्वारा क्षत्रिय में उत्पन्न, प्रत्येक—३,३ भाग लें