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सर्वकोश
दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Dayabhaga of Jimutavahana with Hindi Commentary

जीमूतवाहन (टीकाकार: पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी) द्वारा

DevanagariHindipublished46 पृष्ठ

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पृष्ठ 15

CC-0. Agamnigam Digital Preservation Foundation, Chandigarh
भक्त्या मानव वाङ्मये भवभिदे भूयादशेषेश्वरः ॥
टीका कार सब शस्त्रों का ज्ञाता था—
मीमाँसे बहु सेवितासि सुहृदस्तर्काः समस्ताः स्थ मे
वेदान्ताः परमात्मबोध गुरवो यूयं मयोपासिताः
जाता व्याकरणानि बालसखिता युष्माभिरम्यर्थये
प्राप्तोऽयं समयो मनूक्त विवृतौ साहाय्यमालम्ब्यताम् ॥
मानव वृतावस्यां ज्ञे या व्याख्या नवा मयोद्भिन्ना
प्राचीनाः अभिरुचिरा व्याख्यातॄणामशेषाणाम् ॥
गोविन्द राजा
१०५०—११६० ई० के मध्य
इनके पिता का नाम माधव था । य गंगा किनारे के रहने वाले
थे । बनारस के राजा की तुलना कुछ लोग इन से करते थे उसका
पी. वी. काने महोदय ने खण्डन किया है, क्यों कि राजा क्षत्रिय थे ।
और गोविन्द राज ब्राह्मण ।
दाय भाग की विषय वस्तु—दाय की परिभाषा, पूर्वजों की
सम्पति पर पिता का प्रभाव या स्वत्व पिता या पिता मह की सम्पति
का विभाजन, पिता की मृत्यु के उपरान्त भाइयों में बंटवारा, स्त्री धन
की परिभाषा, श्रेणी करण एवं निक्षेपण, असमर्थता के कारण दाय
एवं बटवारे से कौन लोग पृथक् किये जा सकते हैं, पुत्र हीन के अधिकार
की विधि, गुप्त धन प्राप्त होने पर रिक्थाधि कारियों में वंट वारा
विभाजन प्रकाशन ।
मिताक्षरा दाय भाग से अनेक वैधर्म्य जीमूत वाहन कृत
दायभाग में उपलब्ध हैं । दायभाग में पैतृकसम्पत्ति पर जन्म से ही
अधिकार नहीं हैं ।