दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Dayabhaga of Jimutavahana with Hindi Commentary
जीमूतवाहन (टीकाकार: पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी) द्वारा
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ग्राकार अधिक बड़ा है, ये जीमूत वाहन कुल में उत्पन्न राजाशिलाहार
अपरादित्य कहे जाते हैं । समय १०.-१२०० ई० के मध्य ।
शूलपाणि—
ने याज्ञ वल्क्य स्मृति पर दीपकलिका नामक टीका लिखी है
इनका समय १३१५—१४४० ई० ३० माना जाता है । साहु डियाल
ब्राह्मणों में इन्हें माना जाता है, इनकी दायभाग कृति में विभिन्न
ग्रन्थ कारों के नाम उपलब्ध होते हैं । ।
कुल्लूक भट्ट—
मनु स्मृति की प्रसिद्ध टीका मन्वर्थ मुक्तावली के रचयिता
कुल्लूक भट्ट हैं, इनका भाष्य संक्षिप्त, स्पष्ट एवं उद्देश्य पूर्ण कहा जा
सकता है । पूर्व व्याख्या कारों का कहीं कही उल्लेख करते हुए उनकी
कटु आलो चना भी की है । ये बंगाल के वारेन्द्र कुल में नन्दन निवासी
भट्ट दिवाकर के पुत्र कहे जाते हैं । पण्डितों की सन्निधि में यह भाष्य
वाराणसी में लिखा गया है जैसा कि निम्नलिखित श्लोक से स्पष्ट है ।
गौडे नन्दन वासिनाम्नि सुजनै र्वन्द्य वरेन्द्र यां कुले
श्री मद्भट्ट दिवाकरस्य तनयः कुल्लूक भट्टोऽभवत्
काश्यामउत्तर वाहि जन्हु तनया तीरे समं पण्डितै—
स्तेनेयं क्रियते हिताय विदुषां मन्वर्थ मुक्तावली ।।
मनु सर्वज्ञ हैं मैं अल्पज्ञ, तथापि अन्य टीका कारों के प्रसंग से
टीका लिखने का साहस कर रहा हूँ ।
सर्व ज्ञस्य मनो रसर्वविदपि व्याख्यामि यद्वाङ् मयं
युतया तद्बहुभिर्यतो मुनिवरैरेतद्वहुव्याहृतम्
तां व्याख्यामधुनातनैरपिकृतां न्याय्यां ब्रुवाणास्तमे