दायभाग (जीमूतवाहन - पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)
Dayabhaga of Jimutavahana with Hindi Commentary
जीमूतवाहन (टीकाकार: पं. वासुदेव कृष्ण चतुर्वेदी) द्वारा
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थे । इनके आश्रय दाता—मदनपाल राजा थे ।
नन्द पण्डित
ये दक्षिण के मूल निवासी थे, पश्चात् बनारस में आकर रहे
थे । इन्होंने सहारन पुर के सहगिल कुल के परमानन्द के आग्रहपर--
श्राद्ध कल्पलता का महेन्द्र कुल के हरिवंश वर्मा के आग्रहपर स्मृति
सिन्धु, का एवं मधुरा के केशब नायक के आग्रहपर बैजयन्ती का
प्रणयन किया ।
पराशर स्मृति पर—विद्वन्मनोहरा, तथा मिताक्षरा पर
एक भाष्य लिखा जिसे प्रमिताक्षरा या प्रतीताक्षरा कहते है । कहीं कहीं
मिताक्षरा का खण्डन भी किया है । दत्तक मीमांसा के कारण इनकी
अत्यधिक प्रसिद्धि हुई । इनका रचना काल १५६५ से १६३० ई पर्यन्त
माना जाता है ।
बाल म्भट्टी
बालकृष्ण का ग्रन्थ ही बालम्भट्टी के नाम से प्रसिद्ध है ।
इनका काल १७३०-एवं १८२० ई के मध्य कहा जा सकता है ।
कतिपय विद्वान् इन्हें वैद्यनाथ पायगुण्डे (जो नागेश भट्ट के प्रसिद्ध
शिष्य थे) का पुत्र मानते हैं, पर अभी पूर्ण परिचय प्राप्त नहीं बालं-
भट्टी मिताक्षरा पर भाष्य है, किंवदन्ती है कि इसका प्रणयन लक्ष्मी
देवी ने किया । कुछ विद्वान् बालकृष्ण की माता का नाम लक्ष्मी
तथा वैद्यनाथ की रचना मानते हैं अतः इस विषय में अभी अधिक
नहीं लिखा जा सकता ।
अपरादित्य याअपरार्क—
याज्ञ वल्क्य की बिस्तृतटीका है, मिताक्षरा से इसका