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सर्वकोश
दशरूपक (आचार्य धनञ्जय - धनिक प्रणीत अवलोक टीका एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

दशरूपक (आचार्य धनञ्जय - धनिक प्रणीत अवलोक टीका एवं सविस्तार हिन्दी व्याख्या सटीक)

Dasarupaka of Dhananjaya with Avaloka Commentary

आचार्य धनञ्जय (टीकाकार: धनिक / डॉ. भोलाशंकर व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished168 पृष्ठ

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पृष्ठ 25

नानुरागबीजोद्घाट-
Wait, look at भङ्गीपद्विहस्य in line 3:
Wait, is it भङ्गीपद्विहस्य or भङ्गीमुद्विहस्य or भङ्गीषद्विहस्य or भङ्गीपद्विहस्य?
Look at the characters:
भ - ङ्गी - ? - द्वि - ह - स्य
Look at the third character:
It's ष? No, look at षद्विहस्य!
Wait, "सभ्रूभङ्गीषद्विहस्य" -> सभ्रूभङ्गी + ईषत् + विहस्य = सभ्रूभङ्गीषद्विहस्य!
Yes! ईषद्विहस्य -> षद्विहस्य!
Wait, look at the letter: is it ष?
It is ष! A प with a diagonal cross-stroke inside: ष!
So: भङ्गीषद्विहस्य ।)
Yes, "सभ्रूभङ्गीषद्विहस्य" (smiling slightly with a knit of the eyebrow). Exactly: सभ्रूभङ्गी + ईषद्विहस्य = सभ्रूभङ्गीषद्विहस्य!

Wait, let's look at इत्यनेनानुरागबीजोद्घाट-:
Line 3 ends with: `इत्यनेनानुराग