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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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सुमरिन का अङ्ग
सतगुर पारस की कनी, दीरग दीखै नाहिं ।
जन दरिया षट दरब धन, सब आया उन माहिं ॥४७॥
मीन तड़पती जल बिना, (तेहि) सागर माहिं समाय ।
जन दरिया ऐसी करी, गुरु किरपा मोहिं आय ॥४८॥
भवजल बहता जात था, संसय मोह की बाढ़ ।
दुरिया मोहिं गुरु कृपा कर, पकड़ बाँह लिया काढ़ ॥४६॥
सुमिरन का अंग
राम भजै गुर सब्द ले, तौ पलटै मन देह ।
दरिया छाना¹ क्यों रहै, भू पर बूठा² मेंह ॥१॥
दरिया नाम है निरमला, पूरन ब्रह्म अगाध ।
कहे सुने सुख ना लहै, सुमिरे पावै स्वाद ॥२॥
दरिया सुमिरै राम को, करम भरम सब खोय ।
पूरा गुरु सिर पर तपै, बिघन न लागै कोय ॥३॥
दरिया सुमिरै राम को, कर्म भर्म सब चूर ।
निस तारा सहजै मिटै, जो ऊगै निर्मल सूर ॥४॥
राम बिना फीका लगै, सब किरिया सास्तर ज्ञान ।
दरिया दीपक कह करै, उदय भया निज भान ॥५॥
दरिया सूरज ऊगिया, नैन खुला भरपूर ।
जिन अंधे देखा नहीं, उनसे साहब दूर ॥६॥
दरिया सूरज ऊगिया, चहुं दिस भया उजास ।
नाम प्रकासै देह में, तौ सकल भरम का नास ॥७॥
आन धरम दीपक जिसा, भरमत होय बिनास ।
दरिया दीपक क्या करै, आगे रवि परकास ॥८॥
दरिया सुमिरै राम को, दूजी आस निवार ।
एक आस लागा रहै, तो कधी न आवै हार ॥६॥