सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

पृष्ठ 7, कुल 52 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 7

४ दरिया साहब मारवाड़
अलल बसै आकास में, नीची सुरत निवास।
ऐसे साधू जगत में, सुरत सिखर पिउ पास ॥३५॥
कोयल आले मूढ़१ के, घरै आपना अंड।
निस दिन राखै हेत में, तिन से पड़ै न खंड ॥३६॥
मूढ़ काग समझै नहीं, मोह माया सेवै।
चून चुगावै कोयली, अपना कर लेवै ॥३७॥
चौमासे ऋतु जान कर, पिरथी को जल देत।
कबहूं आवै ऋतु बिना, उस चात्रिक के हेत ॥३८॥
घरहर बरषै आय कर, देख पपीहा चाव।
जिम दरिया सतगुर चवै२, देख माँहिला३ आव ॥३९॥
महा प्रताप सिर पर तपै, किरपा रस पीऊँ।
दरिया बच्चा कच्छ गुरु, जोये ही४ जीऊँ ॥४०॥
जन दरिया गुरदेव जी, ऐसे किया निहाल।
जैसे सूखी बेलड़ी, बरस किया हरियाल ॥४१॥
सतगुर सा दाता नहीं, नहिं नाम सरीखा५ देव।
सिष सुमिरन साँचा करै, हो जाय अलख अभेव ॥४२॥
जन दरिया सतगुर करी, राम नाम की रीझ।
अमृत वूठा६ सब्द का, ऊगा पूरब बीज ॥४३॥
सतगुर वरषै सब्द जल, पर उपकार बिचारि।
दरिया सूखी अवनि७ पर, रहै निवाना८ बारि९ ॥४४॥
सतगुर के इक रोम पर, वारूं बेर अनंत।
अमृत ले मुख में दियो, राम नाम निज तंत ॥४५॥
सतगुर वृक्ष समान हैं, फल से प्रीत न कोय।
फल तरु से लागो रहै, रस पी परिपक होय ॥४६॥
(१) कौवा। (२) वरषा करते हैं। (३) अंतर का। (४) ध्यान रखने से। (५) बराबर।
(६) वरषा। (७) पृथवी। (८) कुवा या बावड़ी। (९) पानी।