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सर्वकोश
दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

दरिया साहिब की बानी: मारवाड़ वाले (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सजीवन नाम व पद)

Dariya Sahib Marwad Wale Ki Bani: Belvedere Press

सन्त दरिया साहिब मारवाड़ (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished52 पृष्ठ

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६ दरिया साहब मारवाड़ि
दरिया नर तन पाय कर, कीया चाहै काज ।
राव रंक दोनों तरैं, जो बैठे नाम जहाज ॥१०॥
नाम जहाज बैठे नहीं, आन करै सिर भार ।
दरिया निश्चय बहेंगे, चौरासी की धार ॥११॥
जन्म अकारथ नाम बिन, आवै जान अजान ।
जन्म मरन जम काल की, मिटै न खैंचा तान ॥१२॥
मुसलमान हिंदू कहा, षट दरसन रंक राव ।
जन दरिया निज नाम बिन, सब पर जम का दाव ॥१३॥
सुर्ग मिर्त पाताल कह, कह तीन लोक बिस्तार ।
जन दरिया निज नाम बिन, सभी काल को चार१ ॥१४॥
दरिया नर तन पाय कर, किया न राम उचार ।
बोझ उतारन आइया, सो लिये चले सिर भार ॥१५॥
जो कोइ साधू गृही में, माहिं राम भरपूर ।
दरिया कह उस दास की, मैं चरनन की धूर ॥१६॥
बाहर बाना भेष का, माहिं राम का राज ।
कह दरिया वे साधवा, हैं मेरे सिर का ताज ॥१७॥
राम सुमिर रामहिं मिला, सो मेरे सिर का मौर ।
दरिया भेष विचारिये, खैर मौर को ठौर ॥१८॥
दरिया सुमिरै राम को, कोटि कर्म की हान ।
जम और काल का भय मिटै, ना काहू की कान ॥१६॥
दरिया सुमिरै राम को, आतम को आधार ।
काया काँची काँच सी, कंचन होत न वार ॥२०॥
दरिया राम सँभालते, काया कंचन सार ।
ज्ञान धर्म और भर्म सब, डाला सिर से भार ॥२१॥
(१) चारा ।