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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 73, कुल 504 में से

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पृष्ठ 73

श्री दादूवाणी-परिचय का अंग 4
दादू भँवर कँवल रस बेधिया, गही जो पीव की ओट।
तहाँ दिल भँवरा रहै, कौण करै शिर चोट ॥ 17 ॥
परिचय जिज्ञासु उपदेश
दादू खोजि तहाँ पीव पाइये, सबद ऊपने पास।
तहाँ एक एकांत है, जहाँ ज्योति प्रकास ॥ 18 ॥
दादू खोजि तहाँ पीव पाइये, जहाँ चन्द न ऊगे सूर।
निरंतर निर्धार है, तेज रह्या भरपूर ॥ 19 ॥
दादू खोजि तहाँ पीव पाइये, जहाँ बिन जिह्वा गुण गाइ।
तहँआदि पुरुष अलेख है, सहजैं रह्या समाइ ॥ 20 ॥
दादू खोजि तहाँ पीव पाइये, जहाँ अजरा अमर उमंग।
जरा मरण भौ भाजसी, राखै अपणे संग ॥ 21 ॥
जिज्ञासु उपदेश (सिंधी)
दादू गाफिल छो वतें, मंझेइ रबु निहारि।
मंझेइ पीव पाण जो, मंझेइ सु विचारि ॥ 22 ॥
दादू गाफिल छो वतें, आहे मंझि अलाह।
पिरी पांण जो पाण सैं, लहै सभोई साव ॥ 23 ॥
दादू गाफिल छो वतें, आहे मंझि मकान।
दरगह में दीवाण तत, पसेन बैठो पाण ॥ 24 ॥
दादू गाफिल छो वतें, अंदर पिरीं पसु।
तखत रबाणीं बीच मैं, पे तिन्हीं वसु ॥ 25 ॥
परिचय साक्षात्कार
हरि चिन्तामणि चिन्ततां, चिंता चित की जाइ।
चिंतामणि चित में मिल्या, तहँ दादू रह्या लुभाइ ॥ 26 ॥
घी सो घोट = आत्म अभ्यास
अपने नैनहुँ आप को, जब आतम देखै।
तहँ दादू परमात्मा, ताही को पेखै ॥ 27 ॥

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