सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग धना श्री 27
साहिब लेखा माँगेगा रे, उत्तर कैसे दीजे ॥ टेक ॥
आगे जाइ पछतावन लागो, पल पल यहु तन छीजे ।
तातैं जिय समझाइ कहूँ रे, सुकृत अब तैं कीजे ॥ 1 ॥
राम जपत जम काल न लागे, संग रहै जन जीजे ।
दादू दास भजन कर लीजे, हरि जी की रास रमीजे ॥ 2 ॥
५30. (गुजराती) काल चेतावनी। प्रति ताल
काल काया गढ़ भेलसी, छीजे दशों दुवारो रे ।
देखतड़ां ते लूटिये, होसी हाहाकारो रे ॥ टेक ॥
नाइक नगर नें मेल्हसी, एकलड़ो ते जाये रे ।
संग न साथी कोइ न आसी, तहँ को जाणे किम थाये रे ॥ 1 ॥
सत जत साधो माहरा भाईड़ा, कांई सुकृत लीजे सारो रे ।
मारग विषम चालिबो, कांई लीजे प्राण अधारो रे ॥ 2 ॥
जिमि नीर निवाणा ठाहरे, तिमि साजी बांधो पालो रे ।
समर्थ सोई सेविये, तो काया न लागे कालो रे ॥ 3 ॥
दादू मन घर आणिये, तो निहचल थिर थाये रे ।
प्राणी नें पूरो मिलै, तो काया न मेल्ही जाये रे ॥ 4 ॥
५31. भयभीत भयानक । दीपचन्दी
डरिये रे डरिये, परमेश्वर तैं डरिये रे ।
लेखा लेवै, भर भर देवै, ताथैं बुरा न करिये रे, डरिये ॥ टेक ॥
सांचा लीजी, सांचा दीजी, सांचा सौदा कीजी रे ।
सांचा राखी, झूठा नाखी, विष ना पीजी रे ॥ 1 ॥
निर्मल गहिये, निर्मल रहिये, निर्मल कहिये रे ।
निर्मल लीजी, निर्मल दीजी, अनत न बहिये रे ॥ 2 ॥
साहि पठाया, बनिजन आया, जनि डहकावै रे ।
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