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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 482

श्री दादूवाणी-राग ललित 26
प्रेम भक्ति प्रीति हरि जानूं, हरि सेवा सुखदाई ।
ज्ञान ध्यान मोहन को मेरे, कंप न लागे काई ॥ 2 ॥
संगि सदा हेत हरि लागो, अंगि और नहिं आवे ।
दादू दीन दयाल दमोदर, सार सुधा रस भावे ॥ 3 ॥
५11. (फारसी) साहिब सिफत। राज मृगांक ताल
महरवान, महरवान!
आब बाद खाक आतिश, आदम नीशान ॥ टेक ॥
शीश पाँव हाथ कीये, नैन कीये कान।
मुख कीया जीव दीया, राजिक रहमान ॥ 1 ॥
मादर पिदर परदः पोश, सांई सुबहान।
संग रहै दस्त गहै, साहिब सुलतान ॥ 2 ॥
या करीम या रहीम, दाना तूँ दीवान।
पाक नूर है हजूर, दादू है हैरान ॥ 3 ॥
इति राग ललित सम्पूर्ण ॥ 26 ॥ पद 5 ॥

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