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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 481, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-राग ललित 26
अम्हचा सज्जन अम्हचा बँधू, प्राण हमारे अम्हचा जिन्दू ॥ 2 ॥
अम्हचा प्रीतम अम्हचा मेला, अम्हची जीवन आप अकेला ॥ 3 ॥
अम्हचा साथी संग सनेही, राम बिना दुख दादू देही ॥ 4 ॥
५०९. (गुजराती) हितोपदेश । गजताल
वाहला माहरा ! प्रेम भक्ति रस पीजिये,
रमिये रमता राम, माहरा वाहला रे ।
हिरदा कमल में राखिये, उत्तम एहज ठाम, माहरा वाहला रे ॥ टेक ॥
वाहला माहरा ! सतगुरु शरणे अणसरे,
साधु समागम थाइ, माहरा वाहला रे ।
वाणी ब्रह्म बखानिये, आनन्द में दिन जाइ, माहरा वाहला रे ॥ 1 ॥
वाहला माहरा ! आतम अनुभव ऊपजे,
ऊपजे ब्रह्म गियान, माहरा वाहला रे ।
सुख सागर में झूलिये, साचो येह स्नान, माहरा वाहला रे ॥ 2 ॥
वाहला माहरा ! भव बन्धन सब छूटिये,
कर्म न लागे कोइ, माहरा वाहला रे ।
जीवन मुक्ति फल पामिये, अमर अभय पद होइ, माहरा वाहला रे ॥ 3 ॥
वाहला माहरा ! अठ सिधि नौ निधि आँगणे,
परम पदारथ चार, माहरा वाहला रे ।
दादू जन देखे नहीं, रातो सिरजनहार, माहरा वाहला रे ॥ 4 ॥
५१०. अखंड प्रीति । गजताल
हमारो मन माई ! राम नाम रंग रातो ।
पिव पिव करै पीव को जानै, मगन रहै रस मातो ॥ टेक ॥
सदा सील संतोष सुहावत, चरण कँवल मन बाँधो ।
हिरदा माँही जतन कर राखूँ, मानों रंक धन लाधो ॥ 1 ॥

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