सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
पृष्ठ 483, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 483
राग जैतश्री
अथ राग जैत श्री 27
(गायन समय दिन 3 से 6)
412. अमिट नाम विनती । पंजाबी त्रिताल
तेरे नाम की बलि जाऊँ, जहाँ रहूँ जिस ठाऊँ ॥ टेक ॥
तेरे बैनों की बलिहारी, तेरे नैनहुँ ऊपरि वारी ।
तेरी मूरति की बलि कीती, वारि-वारि हौं दीती ॥ 1 ॥
शोभित नूर तुम्हारा, सुन्दर ज्योति उजारा ।
मीठा प्राण पियारा, तूं है पीव हमारा ॥ 2 ॥
तेज तुम्हारा कहिये, निर्मल काहे न लहिये ।
दादू बलि बलि तेरे, आव पिया तूँ मेरे ॥ 3 ॥
- 483 -