सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग भैरूं 25
नैनां राम बैनां राम, रसनां राम सँभारि ले ।
श्रवणां राम सन्मुख राम, रमता राम विचारि ले ॥ 1 ॥
श्वासैं राम सुरतैं राम, शब्दैं राम समाइ ले ।
अंतर राम निरंतर राम, आत्मराम ध्याइ ले ॥ 2 ॥
सर्वैं राम संगैं राम, राम नाम ल्यौ लाइ ले ।
बाहर राम भीतर राम, दादू गोविन्द गाइ ले ॥ 3 ॥
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उत्तम स्मरण। मदन ताल
ऐसी सुरति राम ल्यौ लाइ, हरि हृदय जनि बिसरि जाइ ॥ टेक ॥
छिन छिन मात संभारै पूत, बिंद राखै जोगी अवधूत ।
त्रिया कुरूप रूप कों रटै, नटणी निरख बांस बरत चढ़ै ॥ 1 ॥
कच्छप दृष्टि धरै धियांन, चातक नीर प्रेम की बान ।
कुंजी कुरलि संभालै सोइ, भृंगी ध्यान कीट को होइ ॥ 2 ॥
श्रवणों शब्द ज्यूं सुनै कुरंग, ज्योति पतंग न मोड़ै अंग ।
जल बिन मीन तलफि ज्यों मरै, दादू सेवक ऐसै करै ॥ 3 ॥ -
स्मरण फल। एक ताल
निर्गुण राम रहै ल्यौ लाइ, सहजैं सहज मिलै हरि जाइ ॥ टेक ॥
भौजल व्याधि लिपै नही कबहूँ, करम न कोई लागै आइ ।
तीनों ताप जरै नहिं जियरा, सो पद परसै सहज सुभाइ ॥ 1 ॥
जन्म जरा जोनी नहिं आवै, माया मोह न लागै ताहि ।
पाँचों पीड़ प्राण नहीं व्यापै, सकल सोधि सब इहै उपाइ ॥ 2 ॥
संकट संशय नरक न नैनहूँ, ताको कबहूँ काल न खाइ ।
कंप न काई भय भ्रम भागै, सब विधि ऐसी एक लगाइ ॥ 3 ॥
सहज समाधि गहो जे दिढ़ करि, जासौँ लागै सोइ आइ ।
भृंगी होइ कीट की न्यांई, हरि जन दादू एक दिखाइ ॥ 4 ॥
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