सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग भैरूं 25
377. आशीर्वाद । पड़ताल
धन्य धन्य तूँ धन्य धणी, तुम्ह सौं मेरी आइ बणी ॥ टेक ॥
धन्य धन्य तूँ तारे जगदीश, सुर नर मुनिजन सेवैं ईश।
धन्य धन्य तूँ केवल राम, शेष सहस्र मुख ले हरि नाम ॥ 1 ॥
धन्य धन्य तूँ सिरजनहार, तेरा कोई न पावै पार।
धन्य धन्य तूँ निरंजन देव, दादू तेरा लखै न भेव ॥ 2 ॥
378. भयभीत भयानक । दादरा
का जानों मोहि का ले करसी ?
तनहिं ताप मोहि छिन न विसरसी ॥ टेक ॥
आगम मोपै जान्यूं न जाहि, इहै विमासण जियरे मांहि ॥ 1 ॥
मैं नहिं जानों क्या सिर होइ, तातैं जियरा डरपै रोइ ॥ 2 ॥
काहू तैं ले कछू करै, तातैं मइया जीव डरै ॥ 3 ॥
दादू न जानें कैसे कहै, तुम शरणागति आइ रहै ॥ 4 ॥
379. क्रीड़ा तालश्वण्डनि
का जानों राम ! को गति मेरी ? मैं विषयी मनसा नहीं फेरी ॥ टेक ॥
जे मन मांगै सोई दीन्हा, जाता देख फेरि नहिं लीन्हा ॥ 1 ॥
देवा द्वन्द्वर अधिक पसारे, पाँचों पकर पटक नहिं मारे ॥ 2 ॥
इन बातन घट भरे विकारा, तृष्णा तेज मोह नहिं हारा ॥ 3 ॥
इनहिं लाग मैं सेव न जानी, कहै दादू सुन कर्म कहानी ॥ 4 ॥
380. क्रीड़ा तालश्वण्डनि
डरिये रे डरिये, तातैं राम नाम चित धरिये ॥ टेक ॥
जिन ये पँच पसारे रे, मारे रे ते मारे रे ॥ 1 ॥
जिन ये पँच समेटे रे, भेटे रे ते भेटे रे ॥ 2 ॥
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